सपा का साइकिल चिह्न: 17 जनवरी तक फैसला न होने पर लग सकती है रोक
समाजवादी पार्टी के दो गुटों में बंटने के बाद चुनाव चिह्न साइकिल को लेकर खींचतान तेज है। दोनों धड़ों के नेता इस चिह्न पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अगर चुनाव आयोग तय नहीं कर पाया कि पार्टी में बहुमत किसके पास है, तो इस चुनाव में साइकिल चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लग सकती है।
आयोग के सामने मामला
दोनों गुटों ने चुनाव आयोग को अलग-अलग दस्तावेज सौंपे हैं। आयोग ने दोनों को हलफनामा दाखिल करने के लिए 9 जनवरी तक का समय दिया था। सूत्रों के अनुसार यदि 17 जनवरी तक यह तय नहीं हो सका कि सपा में बहुमत किस गुट के साथ है, तो चिह्न जब्त किया जा सकता है।
समय की मजबूरी
राज्य में पहले चरण के मतदान से पहले दो फरवरी को अधिसूचना जारी होनी है। इसके बाद नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और फिर चुनाव चिह्न आवंटित नहीं किए जा सकेंगे। ऐसे में अगर तब तक विवाद नहीं सुलझा, तो दोनों गुट एक ही चिह्न पर चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इसलिए आयोग के सामने इस मामले का जल्द से जल्द निपटारा करने की चुनौती है।
आगे क्या हुआ
2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 312 सीटें जीतीं, सपा को 47 और बसपा को 19 सीटें मिलीं। योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने।
यह भी देखें: समाजवादी पार्टी और भारत के चुनाव
मूल रूप से 9 जनवरी 2017 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।
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