उत्तर प्रदेश: भाजपा पर उम्मीदवार घोषित करने का दबाव बढ़ा
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा पर उम्मीदवारों के नाम घोषित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। पार्टी अब तक रैलियों और जनसभाओं के जरिए टिकट के दावेदारों की ताकत परखती रही है, लेकिन ये कार्यक्रम अब आखिरी चरण में हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा जनवरी तक प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर सकती है।
विरोधी दल आगे
समाजवादी पार्टी लगभग उन सभी सीटों पर प्रत्याशी तय कर चुकी है जहां वह पिछली बार हारी थी। चर्चा है कि सपा अपने कुछ मौजूदा विधायकों के टिकट भी काट सकती है, जिसके चलते वे विधायक अपनी दावेदारी बचाने की कोशिश में लगे हैं। बसपा ने भी 85 फीसद से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में अपने प्रभारी या प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।
भाजपा में दावेदारों की भीड़
भाजपा में दूसरे दलों से आने वालों की संख्या बढ़ी है। सपा, बसपा और कांग्रेस के अनेक विधायक पाला बदलकर भाजपा में आ चुके हैं, जिससे उनके क्षेत्रों में हलचल है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा 337 विधानसभा क्षेत्रों में सबसे आगे रही थी, इसलिए अधिकतर दावेदार मानते हैं कि पार्टी का टिकट मिलना जीत की गारंटी जैसा है।
हालत यह है कि हर सीट पर आठ से दस मजबूत दावेदार हैं। उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरकर माहौल बनाना चाहते हैं, लेकिन टिकट तय न होने के कारण वे खुलकर प्रचार नहीं कर पा रहे।
आगे क्या हुआ
2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 312 सीटें जीतीं, सपा को 47 और बसपा को 19 सीटें मिलीं। योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने।
यह भी देखें: भारतीय जनता पार्टी और उत्तर प्रदेश विधानसभा सदस्य
मूल रूप से 9 दिसंबर 2016 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।
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