उपचुनाव 2018: चार लोकसभा और दस विधानसभा सीटें बनीं भाजपा और विपक्ष की परीक्षा

कर्नाटक विधानसभा के नतीजों के बाद सोमवार को 11 राज्यों में चार लोकसभा और दस विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान हुआ। इन चुनावों को भाजपा और एकजुट हो रहे विपक्ष, दोनों की राजनीतिक साख की कसौटी माना गया। चारों लोकसभा सीटें इससे पहले भाजपा के पास थीं, इसलिए सबसे ज्यादा जोखिम उसी का था।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले चार वर्षों में ज्यादातर लोकसभा उपचुनाव हारने से लोकसभा में भाजपा की सीटें 282 से घटकर 272 रह गई थीं। कर्नाटक के घटनाक्रम से उत्साहित विपक्ष ने उत्तर प्रदेश की कैराना सीट पर भाजपा के सामने साझा उम्मीदवार उतारकर अपने इरादे साफ कर दिए।
लोकसभा की चार सीटें
- कैराना (उत्तर प्रदेश, लगभग 17 लाख मतदाता): भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन से रिक्त हुई। भाजपा ने उनकी बेटी मृगांका सिंह को टिकट दिया, जबकि विपक्ष की ओर से राष्ट्रीय लोकदल की तबस्सुम हसन मैदान में थीं, जिन्हें सपा, बसपा और कांग्रेस ने समर्थन दिया। इस संसदीय क्षेत्र में शामली, थाना भवन, कैराना, गंगोह और नाकुर विधानसभा क्षेत्र आते हैं और मुस्लिम, जाट व दलित मतदाता अहम हैं। गोरखपुर और फूलपुर गंवा चुकी भाजपा के लिए यह वापसी का मौका था, तो विपक्ष के लिए 2019 से पहले गठजोड़ का प्रयोग।
- भंडारा-गोंदिया (महाराष्ट्र, लगभग 19 लाख मतदाता): यह सीट तब खाली हुई जब भाजपा सांसद नाना पटोले इस्तीफा देकर कांग्रेस में चले गए। चारों बड़े दल मैदान में थे, पर सीधी लड़ाई भाजपा और राकांपा में मानी गई। पटोले खुद नहीं लड़ रहे थे और कांग्रेस-राकांपा के साझा प्रत्याशी के साथ थे। विश्लेषण के मुताबिक भाजपा की जीत शिवसेना को अपने आक्रामक विरोध पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर सकती थी, जबकि हार 2019 में दोनों के अलग रहने का संकेत बन सकती थी।
- पालघर (लगभग 16 लाख मतदाता): भाजपा के चिंतामन वानगा के निधन से रिक्त हुई। शिवसेना ने उनके बेटे श्रीनिवास वानगा को उतारा, जबकि भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर आए राजेंद्र गावित पर दांव लगाया। यहां मुख्य टक्कर भाजपा और शिवसेना में मानी गई।
- नगालैंड (लगभग 12 लाख मतदाता): नेफियू रियो के विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए लोकसभा सीट छोड़ने से उपचुनाव हुआ। यहां नगा पीपुल्स फ्रंट और सत्तारूढ़ पीपुल्स डेमोक्रेटिक अलायंस में टक्कर बताई गई।
विधानसभा सीटों पर मुकाबले
कर्नाटक की राजाराजेश्वरी नगर सीट पर 12 मई के विधानसभा चुनाव के दौरान वोटिंग इसलिए टाली गई थी क्योंकि एक फ्लैट से नौ हजार से ज्यादा मतदाता पहचान पत्र मिले थे। यहां भाजपा, कांग्रेस और जदएस आमने-सामने थे। उत्तर प्रदेश की नूरपुर सीट भाजपा विधायक लोकेंद्र सिंह की सड़क हादसे में मौत के बाद खाली हुई। भाजपा ने उनकी बेटी अवनि सिंह को उतारा, सपा ने रालोद से तालमेल कर अपना प्रत्याशी खड़ा किया और बसपा न तो लड़ी, न किसी को समर्थन का एलान किया।
बिहार की जोकीहाट सीट पर जदयू और राजद में सीधा मुकाबला था। पंजाब की शाहकोट सीट अकाली विधायक अजीत सिंह कोहर के निधन से रिक्त हुई, जहां कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल के बीच तिकोनी लड़ाई थी। झारखंड की गोमिया सीट विधायक योगेंद्र सिंह के अयोग्य ठहराए जाने से खाली हुई; वहां भाजपा, आजसू और झामुमो मैदान में थे, जबकि सिल्ली में असली टक्कर आजसू और झामुमो के बीच थी।
आगे क्या हुआ
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 543 में से 303 सीटें जीतीं और नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2019 को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
यह भी देखें: चुनाव समाचार
मूल रूप से 29 मई 2018 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।
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