कैराना हार के बाद भाजपा में मंथन, महाराष्ट्र उपचुनाव से भी मिले नए सबक

गोरखपुर और फूलपुर के बाद कैराना में भी एकजुट विपक्ष के हाथों हारने वाली भाजपा ने गुरुवार को आए उपचुनाव नतीजों के बाद आत्ममंथन शुरू किया। 10 विधानसभा और चार लोकसभा सीटों के नतीजों को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना गया। रिपोर्ट के अनुसार पार्टी जनसंपर्क अभियान तेज करने और मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए बूथ प्रबंधन पर ध्यान देने की तैयारी में थी।
भाजपा की चिंता
कर्नाटक में भाजपा बहुमत से पीछे रह गई थी, और उससे पहले राजस्थान, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के उपचुनाव भी उसके लिए परेशानी भरे रहे। कैराना की हार ने विपक्षी एकता को नई ताकत दी। पार्टी यह मानने को तैयार नहीं थी कि विपक्ष का असरदार गठबंधन बन पाएगा, लेकिन गुरुवार को शीर्ष नेताओं के बीच इस पर बात हुई। सूत्रों के अनुसार नेतृत्व की बड़ी चिंता यह थी कि समर्थकों में मतदान को लेकर उत्साह कम दिखा।
कैराना में लगभग छह दर्जन बूथों पर दोबारा मतदान के बावजूद करीब 62 फीसद ही वोट पड़े। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह लगातार 50 फीसद वोट की तैयारी पर जोर दे रहे थे। 2014 के बाद कई राज्यों में कारगर रही बूथ प्रबंधन और पन्ना प्रमुख की रणनीति हाल के चुनावों में कमजोर पड़ती दिखी; राजस्थान में पिछले साल हुए संसदीय उपचुनाव में तो कुछ बूथों पर पार्टी को एक भी वोट नहीं मिला था। बताया गया कि शाह इन कमजोरियों से नाराज थे। पार्टी केंद्र की सात योजनाओं को घर-घर पहुंचाने, 22 करोड़ वंचित परिवारों में सद्भावना बढ़ाने और कार्यकर्ताओं से संवाद मजबूत करने की कोशिश में थी।
महाराष्ट्र के नतीजे
महाराष्ट्र में भाजपा ने पालघर सीट 29,572 वोटों से जीती, लेकिन भंडारा-गोंदिया करीब 40,000 वोटों से हार गई। भंडारा-गोंदिया को राकांपा नेता प्रफुल पटेल का परंपरागत क्षेत्र माना जाता है, जो 2014 में यहां हार गए थे। भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीते नाना पटोले कुछ महीने पहले सांसदी और पार्टी दोनों छोड़ चुके थे। उपचुनाव में राकांपा ने मधुकर कुकड़े को उतारा और कांग्रेस में जा चुके पटोले ने उनका समर्थन किया।
पालघर में शिवसेना ने दिवंगत भाजपा सांसद चिंतामणि वनगा के बेटे श्रीनिवास वनगा को टिकट दिया, जबकि भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र गावित पिछली बार कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में हार चुके थे। बहुजन विकास आघाड़ी और कांग्रेस भी मैदान में थीं। शिवसेना दूसरे स्थान पर रही और कांग्रेस पांचवें स्थान पर खिसक गई, इसलिए विश्लेषण में सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस का बताया गया।
विरोधी दलों की प्रतिक्रिया
भाजपा की पूर्व सहयोगी तेलुगु देसम पार्टी के नेता और आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री यनामला रामकृष्णनुडु के मुताबिक नतीजे देश का मूड दिखाते हैं और भाजपा का पतन कर्नाटक से शुरू हो चुका है। राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक ने भंडारा-गोंदिया की जीत को प्रधानमंत्री की कार्यशैली के प्रति लोगों की नाराजगी बताया और दावा किया कि अगर कांग्रेस बहुजन विकास आघाड़ी का साथ देती तो भाजपा पालघर भी नहीं जीत पाती।
रिपोर्ट में यह भी याद दिलाया गया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ज्यादातर उपचुनाव हारी थी, फिर भी विधानसभा चुनाव में उसने 325 सीटें हासिल की थीं।
आगे क्या हुआ
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 543 में से 303 सीटें जीतीं और नरेंद्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।
मूल रूप से 1 जून 2018 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।
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