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कर्नाटक की सत्ता में क्षेत्रीय दलों से ज्यादा रहा है राष्ट्रीय दलों का दबदबा

कर्नाटक

कर्नाटक में 12 मई को होने वाले विधानसभा मतदान से पहले एक विश्लेषण में कहा गया है कि दक्षिण भारत के दूसरे राज्यों के विपरीत यहां के मतदाताओं ने क्षेत्रीय दलों की बजाय राष्ट्रीय दलों पर ज्यादा भरोसा जताया है। क्षेत्रीय दल मौजूद जरूर रहे, लेकिन पिछले 35 वर्षों में सत्ता ज्यादातर राष्ट्रीय दलों के हाथ में रही। इस बार भी मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच माना जा रहा है।

केंद्र और राज्य में अलग पसंद

विश्लेषण के अनुसार कर्नाटक के मतदाताओं ने अक्सर केंद्र में सत्ता पाने वाले दल को राज्य में सरकार बनाने का मौका नहीं दिया। प्रमुख चुनावों पर एक नजर:

  • 1983: आजादी के बाद पहली बार राज्य में कांग्रेस हारी। जनता पार्टी सबसे बड़ा दल बनी और सरकार भाजपा और माकपा के बाहर से दिए समर्थन पर टिकी रही। करीब दो साल बीतने पर मध्यावधि चुनाव में रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व में उसे पूर्ण बहुमत मिला और राज्य की राजनीति दो-दलीय मुकाबले में बदल गई।
  • 1989: लोकसभा चुनाव में कांग्रेस देश भर में हारी और जनता दल के वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने, लेकिन कर्नाटक की 28 में से 27 लोकसभा सीटें कांग्रेस को मिलीं। इसके बाद विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 224 में से 178 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की।
  • 1994: केंद्र में पीवी नरसिंह राव की कांग्रेस सरकार थी, पर राज्य में जनता दल जीता, एचडी देवगौड़ा ने सरकार बनाई और कांग्रेस तीसरे स्थान पर खिसक गई।
  • 1999: केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को बहुमत मिला, जबकि राज्य की 28 लोकसभा सीटों में से 18 कांग्रेस के खाते में गईं, साथ ही उसने 224 में से 132 विधानसभा सीटें भी जीतीं। एसएम कृष्णा के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनी और भाजपा को 44 सीटें मिलीं।
  • 2004: केंद्र में संप्रग की सरकार बनी, लेकिन राज्य में भाजपा ने 18 लोकसभा सीटें जीतीं और विधानसभा में सबसे बड़ा दल बनी। फिर भी 65 सीटों वाली कांग्रेस और 58 सीटों वाले जनता दल (सेक्युलर) ने मिलकर राज्य की पहली गठबंधन सरकार बनाई।
  • 2013: राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी, पर उसके अगले साल हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा 28 में से 17 सीटों पर जीती।

भाजपा का उभार

पिछली सदी के आखिरी दो दशकों में कांग्रेस और जनता पार्टी बारी-बारी से सरकार बनाते रहे और भाजपा राज्य में पैर नहीं जमा सकी। 2004 में यह स्थिति बदली, और उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 110 सीटें जीतकर अपनी सरकार बनाई।

आगे क्या हुआ

15 मई 2018 को हुई मतगणना में 224 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 104, कांग्रेस को 78 और जद(एस) को 37 सीटें मिलीं। बी. एस. येदियुरप्पा ने विश्वास मत से पहले ही इस्तीफा दे दिया और 23 मई 2018 को कांग्रेस के समर्थन से जद(एस) के एच. डी. कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने। जुलाई 2019 में यह सरकार गिर गई और येदियुरप्पा फिर मुख्यमंत्री बने।

यह भी देखें: भाजपा | कांग्रेस

मूल रूप से 7 मई 2018 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।






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