यूपी निकाय चुनाव में अकेले उतरेगी कांग्रेस, सपा से गठबंधन नहीं
विधानसभा चुनाव के समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने हाथ मिलाया था, लेकिन नगर निकाय चुनाव में यह साथ टूटता दिख रहा है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह निकाय चुनाव अकेले लड़ेगी। ऐसे में यानी विधानसभा चुनाव में साथ प्रचार करने वाले अखिलेश यादव और राहुल गांधी, जो कांग्रेस उपाध्यक्ष हैं, की पार्टियां इस बार आमने-सामने होंगी। माना जा रहा है कि कांग्रेस निकाय चुनाव के जरिये 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी मजबूत करना चाहती है।
राज बब्बर का तर्क
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने कहा कि निकाय चुनाव विचारधारा से ज्यादा व्यक्तिगत होते हैं और इन्हें पार्टी कार्यकर्ता लड़ते हैं। उनके मुताबिक इसमें गठबंधन होने से जमीनी कार्यकर्ता निराश होंगे और कोई उसे स्वीकार नहीं करेगा। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव में गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका फैसला पार्टी हाईकमान करेगा। बसपा से गठबंधन पर भी उनका जवाब यही था कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी को जो निर्देश मिलेंगे, उसी के हिसाब से काम होगा।
जमीनी तैयारी
निकाय चुनाव के लिए फैजाबाद मंडल की प्रभारी और कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा अपने मंडल में अकेले लड़ने की तैयारी पहले ही शुरू कर चुकी हैं। वह पिछले करीब दो हफ्तों से बैठकों के जरिये कार्यकर्ताओं को तैयार कर रही हैं। शुक्रवार को फैजाबाद में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने बूते और अपने चुनाव चिह्न पर लड़ेगी।
आगे क्या हुआ
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 543 में से 303 और कांग्रेस को 52 सीटें मिलीं, और नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2019 को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
यह भी देखें: चुनाव
मूल रूप से 13 सितंबर 2017 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।
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