LIVE
Tamil Nadu assembly election results: TVK set to emerge as single largest partyNews On AIRIndia News | TMC Announces Abdul Salam as Candidate for Nagaon Lok Sabha Bypoll in AssamLatestLYBJP Plans ‘Akhilesh Se Behtar Yogi’ Campaign For 2027 UP Polls, To Highlight Governance And Development RecordFree Press JournalTrinamool Names Candidates For Nandigram, Rejinagar BypollsNDTVECI gives Mamata, Ritabrata more time to submit documents in Trinamool symbol disputeThe HinduNo interim order from ECI, has sought more documents by 16 Sep: TMCNational HeraldGoa First: AAP, Goa Forward party join hands ahead of 2027 pollsIndia.comStay Madurantakam and Dharapuram byelections, urges plea at Madras High CourtThe HinduUncertainty over TMC name, symbol ahead of Bengal bypoll nominationsNational HeraldAlliance partners have agreed to fight together: Bhupesh Baghel on Assam's Nagaon Lok Sabha by-electionIndia's News.Net
8010003355
Main Menu

सियासी जंगः कर्नाटक में विधानसभा चुनाव से पहले संदेश की लड़ाई

विधानसभा चुनाव

विधानसभा चुनाव से पहले संदेश की लड़ाई कर्नाटक में, सियासी जंग कांग्रेस और भाजपा, लेकिन राजनीति में दिखने दिखाने का भी अर्थ होता है और इसके लिए सही वक्त का भी।

चित्रदुर्ग  । अगले महीने होने जा रहे कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा की लड़ाई का अंदाज जुदा-जुदा है। दरअसल, लड़ाई से पहले की तैयारी ही बहुत कुछ संकेत दे रही है। बहुत विश्वस्त दिखने की कोशिश में मुख्यमंत्री सिद्दरमैया हताशा में हाथ पैर मारते दिख रहे हैं। सब कुछ साधने की कोशिश हो रही है। दूसरी ओर भाजपा अतिसतर्क होकर फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है जो यह संदेश दे सकता है कि विश्वास की थोड़ी कमी है। कांग्रेस ने 224 विधानसभा सीटों में से 218 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। लगभग एक दर्जन पुराने विधायकों को छोड़कर सभी पुराने खिलाड़ी मैदान में उतार दिए गए हैं। जबकि भाजपा में मंगलवार शाम तक लगभग 70 सीटों पर चयन होना बाकी था।

कर्नाटक में चुनावी अभियान अभी गर्म नहीं हुआ है। लेकिन राजनीति में दिखने दिखाने का भी अर्थ होता है और इसके लिए सही वक्त का भी। कांग्रेस और भाजपा में ही आमने-सामने की लड़ाई है और इस नाते मैदान में आपसी भिड़ंत से पहले इनके तेवर और रुख को ही आंका जा रहा है। कांग्रेस को इसका अहसास है कि उसके खिलाफ पांच साल की सत्ता विरोधी लहर है। शासन प्रशासन के तौर पर गिनाने को बहुत कुछ नहीं है। सिद्दरमैया इससे भी अंजान नहीं हैं कि पार्टी के अंदर ही ऐसे कई लोग हैं जो नहीं चाहेंगे कि वह और मजबूत होकर उभरें। ऐसे लोगों की संख्या काफी है। उम्मीदवारों का चयन जिस तरह किया गया है, वह भी इसका संकेत देता है। महज एक दर्जन विधायकों को छोड़कर बाकी सभी को फिर से मैदान में उतार दिया गया है।

जाहिर तौर पर विधायकों के खिलाफ सत्ताविरोधी लहर का असर कुछ ज्यादा हो सकता है, लेकिन सिद्दरमैया के लिए इससे भी ज्यादा जरूरी यह था कि पार्टी में उनके विरोधियों की संख्या और न बढ़े। दरअसल, सिद्दरमैया की लड़ाई कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लिए तो हो ही रही है, वह खुद को बचाने की लड़ाई भी लड़ रहे हैं इसीलिए वह सब कुछ साधने में जुटे हैं। इसका अंदाजा लिंगायत को अल्पसंख्यक दर्जा देने जैसे प्रस्ताव से साफ दिखा था। लेकिन सिद्दरमैया की छटपटाहट को जनता कितना समर्थन देती है यह देखने की बात होगी।

दूसरी तरफ येद्दयुरप्पा हैं जो निश्चित तौर पर लिंगायत और कुछ मायनों में कर्नाटक के सबसे बड़े नेता माने जा सकते हैं। लेकिन सिद्दरमैया के लिंगायत कार्ड की पूरी काट उनके पास है, यह अभी कहना मुश्किल है। ध्यान रहे कि भाजपा से निकलने के बाद पिछले चुनाव में वह अपनी अलग पार्टी बनाकर लड़े थे और भाजपा का कई स्थानों पर नुकसान किया था। ऐसी लगभग दो दर्जन सीटें थीं। लेकिन वह उनके लिए सहानुभूति और उभार का वक्त था। अब नई स्थिति में उन्हें परखे जाने की जरूरत है।

जो भी हो, असली लड़ाई बाकी है। औपचारिक रूप से अभियान का शंखनाद भी बचा हुआ है। सबसे बड़ी बात भाजपा के स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आना बाकी है।






Comments are Closed