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मिशन 2019: बिहार में तेज हुई दलित राजनीति, विपक्ष की रणनीति काटने में जुटी BJP

आगामी लोकसभा चुनाव (मिशन 2019) को ले बिहार में दलित राजनीति तेज हो गई है। इस मुद्दे पर विपक्ष की रणनीति को काटने में भाजपा जुट गई है। इसे लेकर मंगलवार को पार्टी की अहम बैठक है।

पटना [रमण शुक्ला]। एससी-एसटी एक्ट के मुद्दे पर दलित राजनीति में उबाल के बाद बिहार भाजपा ने सधे हुए कदमों से 2019 में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। विपक्ष द्वारा फैलाए गए आरक्षण के सियासी शिगूफे में उलझकर बिहार में 2015 के विधानसभा चुनाव में पार्टी जीती बाजी हार चुकी है। विपक्ष एक बार फिर इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश में है, लेकिन भाजपा किसी भी कीमत पर विपक्ष को माइलेज नहीं देना चाहती है। इसे ध्यान में रखते हुए भाजपा राजद- कांग्रेस के भ्रमजाल को काटने की तैयारी में जुट गई है।

इसी उद्देश्य से शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर मंगलवार को ज्ञान भवन में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों, मंच, मोर्चा और अनुषांगिक संगठनों की बैठक बुलाई गई है। बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री व बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव और राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह बतौर मुख्य वक्ता पार्टी पदाधिकारियों से लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं को गांव-गांव कूच करने के टिप्स देंगे।

एससी-एसटी को पक्ष में करने का प्लान तैयार

दरअसल, भाजपा सियासी नफा-नुकसान के मंथन के साथ राज्य में विपक्षी पार्टियों को कोई मौका नहीं देना चाहती है। यही वजह है कि बिहार में 22 फीसद से अधिक आबादी वाले इस बड़े वर्ग की नाराजगी से चुनाव में होने वाले नुकसान की आशंका देख उन्हें मनाने का प्लान भी तैयार कर लिया है। इसके लिए भाजपा सांसदों और नेताओं को दलित बहुल गांवों में रात बिताने के निर्देश दिए गए हैं।

साथ ही भाजपा ने दलितों की नाराजगी से जुड़ी समस्याओं को समझ कर उन्हें हल करने के उपायों पर भी तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने 5 मई तक ग्राम स्वराज अभियान चलाने और दलित बस्तियों में समरसता भोज आयोजित करने निर्देश दिए हैं।

बता दें कि वर्तमान में देश में एससी-एसटी की आबादी 20 करोड़ से ज्यादा है। लोकसभा में इस वर्ग से 131 सांसद हैं। भाजपा के सबसे ज्यादा 67 सांसद इसी वर्ग से हैं। लिहाजा इसे लेकर भाजपा चिंतित और सतर्क है।

कौन-कौन बुलाए गए

बिहार भाजपा के उपाध्यक्ष एवं कार्यालय प्रभारी देवेश कुमार बताते हैं कि पार्टी ने सभी पदाधिकारियों, सांसद, विधायक, विधान पार्षद, लोकसभा और विधानसभा चुनाव के पूर्व प्रत्याशी, जिलाध्यक्षों, मंच, मोर्चा, विभाग और प्रकल्प के पदाधिकारियों बुलाया है।

दलितों को मनाने के लिए भाजपा के चार फार्मूले

1. ठंडे पड़े भाजपा के एससी-एसटी मोर्चे को सक्रिय करना।

2. मोर्चा पदाधिकारियों को योजनाओं के साथ दलित क्षेत्रों में भेजना।

3. जिला भाजपा दफ्तर में वर्कशॉप जिसमें एससी-एसटी मंत्री, प्रभावी सांसदों की मौजूदगी अनिवार्य रूप से होगी।

4. संगठन, सरकार में हर स्तर पर दलितों के प्रतिनिधित्व को उभारना।

भाजपा इन मुद्दों से परेशान

1. पदोन्नति और निजी क्षेत्र में आरक्षण का मामला।

2. भर्तियों में दलितों का बैकलॉग।

3. एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का 20 मार्च को आया आदेश।

4. विश्वविद्यालय और संस्थानों में आरक्षण का मुद्दा और रोस्टर प्रणाली पर यूजीसी के आदेश पर विरोध।