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यूपी चुनाव: पूर्वांचल में ‘बिहारी फैक्टर’ साधने में जुटे दल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के कई जिलों में राजनीतिक दल बिहार से आकर बसे मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश में लगे हैं। चुनाव भले यूपी का हो, लेकिन इन इलाकों में ‘बिहारी फैक्टर’ को अहम माना जा रहा है।

दलों की रणनीति

वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, बलिया, मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों में बिहार मूल के लोगों को साधने के लिए दलों ने खास योजना बनाई है। इसके तहत सभी पार्टियों ने बिहार के प्रमुख नेताओं को इन इलाकों में प्रचार के लिए भेजा है।

पृष्ठभूमि

बिहार से बनारस और यूपी के अन्य सीमावर्ती जिलों में आकर बसने का सिलसिला लालू प्रसाद यादव की सरकार के दौर में तेज हुआ। उस समय बिहार में कानून-व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की खराब हालत के कारण बहुत से लोग यूपी के शहरों की ओर आए।

इसका नतीजा यह हुआ कि वाराणसी समेत गंगा किनारे के शहरों में बिहार से आए लोगों की संख्या काफी बढ़ गई। वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और बलिया की कई सीटों पर इन मतदाताओं को निर्णायक माना जाता है। वाराणसी शहर की तीन सीटों पर ये मतदाता पहले भी चुनाव नतीजों की दिशा बदलते रहे हैं।

आगे क्या हुआ

2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा ने 312 सीटें जीतकर सरकार बनाई। सपा 47 और बसपा 19 सीटों पर सिमट गई। चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ राज्य के मुख्यमंत्री बने।

यह भी देखें: उत्तर प्रदेश के विधायक

मूल रूप से 3 मार्च 2017 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।






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