कर्नाटक नतीजे: भाजपा के बेहतर प्रदर्शन और कांग्रेस की हार के प्रमुख कारण

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद एक विश्लेषण में तर्क दिया गया कि भाजपा का प्रदर्शन दिखाता है कि मोदी लहर अब भी कायम है, जबकि कांग्रेस को पिछले चुनाव के मुकाबले भारी नुकसान हुआ। विश्लेषण के अनुसार भाजपा पूरी ताकत से मैदान में उतरी, जबकि कांग्रेस न ठोस रणनीति बना सकी और न ही उतनी तैयारी से लड़ी।
भाजपा के पक्ष में गए कारण
- मोदी की रैलियां: लेख के मुताबिक प्रधानमंत्री के प्रचार में उतरने से पहले पार्टी की स्थिति कमजोर थी और उनकी 21 रैलियों ने बाजी पलट दी।
- योगी आदित्यनाथ: नाथ संप्रदाय के प्रमुख योगी ने करीब 33 सीटों पर प्रचार किया; राज्य में इस संप्रदाय के अनुयायियों का बड़ा तबका होने से पार्टी को फायदा मिलने की बात कही गई।
- सोशल इंजीनियरिंग: लिंगायत, आदिवासी, दलित और ओबीसी वर्गों को साथ लाने की कोशिश।
- एकजुटता: 2013 में भाजपा से अलग रहते हुए येद्दयुरप्पा और श्रीरामुलू की पार्टियों ने क्रमशः 10 और तीन फीसदी वोट हासिल कर नुकसान पहुंचाया था; दोनों की वापसी से वोट शेयर बढ़ा।
- रेड्डी बंधु: अवैध खनन के आरोपी जनार्दन रेड्डी के परिजनों और करीबियों को टिकट देना और बेल्लारी के आसपास की सीटों की जिम्मेदारी सौंपना।
- लिंगायत समर्थन: 16 फीसदी वोट वाले लिंगायतों के गढ़ मध्य कर्नाटक में उम्मीद से बेहतर नतीजे।
कांग्रेस की हार के कारण
- सत्ता विरोधी माहौल: लिंगायतों के लिए अलग धार्मिक पहचान और इंदिरा कैंटीन जैसे फैसले भी मतदाताओं को नहीं लुभा सके; भाजपा भ्रष्टाचार और केंद्रीय योजनाएं लागू न करने के मुद्दों पर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करने में कामयाब रही।
- मोदी का जवाब नहीं: राहुल गांधी ने प्रचार में पूरी ताकत लगाई, लेकिन मोदी के हमलों की काट नहीं ढूंढ सके।
- वोटों का बंटवारा: भाजपा विरोधी वोट एनसीपी और जेडीएस में बंटे; बसपा और एनसीपी 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस तीसरा मोर्चा बनाने में जुटी थीं।
- गुटबाजी: सिद्दरमैया को खुली छूट और टिकट बंटवारे में उनकी ही चलने से कई नेता नाराज थे।
- लिंगायत कार्ड: 76 सीटों पर असर रखने वाले लिंगायतों को अलग धार्मिक मान्यता देने का दांव उल्टा पड़ा; मोदी और अमित शाह इसे हिंदू धर्म को बांटने वाला कदम बताने में सफल रहे।
लेख में यह भी कहा गया कि चुनाव से पहले गठबंधन की चर्चाओं से संदेश गया कि विपक्ष भाजपा से मुकाबले के लिए तैयार नहीं है, और ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ गठबंधन की अपनी पहल में कांग्रेस को कम महत्व दिया था।
आगे क्या हुआ
15 मई 2018 को हुई मतगणना में 224 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 104, कांग्रेस को 78 और जद(एस) को 37 सीटें मिलीं। बी. एस. येदियुरप्पा ने विश्वास मत से पहले ही इस्तीफा दे दिया और 23 मई 2018 को कांग्रेस के समर्थन से जद(एस) के एच. डी. कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने। जुलाई 2019 में यह सरकार गिर गई और येदियुरप्पा फिर मुख्यमंत्री बने।
मूल रूप से 16 मई 2018 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।
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