कर्नाटक में दोहरा शक्ति परीक्षण: विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव और विश्वास मत से पहले भाजपा ने उतारा उम्मीदवार

कर्नाटक में 25 मई 2018 का दिन नई सरकार के लिए दोहरी परीक्षा का था। मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी की कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन सरकार को उसी दिन पहले विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव और फिर विश्वास मत जीतना था। सरकार न बचा पाने के बावजूद भाजपा ने अध्यक्ष पद के लिए अपना उम्मीदवार उतार दिया।
दोनों ओर के उम्मीदवार
भाजपा ने बेंगलुरु से कई बार विधायक रहे वरिष्ठ नेता एस. सुरेश कुमार को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने गुरुवार को विधानसभा सचिव के सामने नामांकन भरा। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष बी. एस. येदियुरप्पा के निर्देश पर पर्चा भरा है। गठबंधन की ओर से कांग्रेस विधायक के. आर. रमेश कुमार उम्मीदवार थे, जो 1994 से 1999 तक भी विधानसभा अध्यक्ष रह चुके थे। गठबंधन ने 117 विधायकों के समर्थन का दावा किया, जबकि भाजपा के पास 104 विधायक थे। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भाजपा से अपना उम्मीदवार वापस लेने की अपील की।
पृष्ठभूमि
15 मई को आए नतीजों में किसी दल को बहुमत नहीं मिला था। येदियुरप्पा ने 17 मई को शपथ ली, पर विश्वास मत से पहले 19 मई को इस्तीफा दे दिया। कुमारस्वामी ने 23 मई को शपथ ली और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जी. परमेश्वर उप मुख्यमंत्री बने। मतदान से पहले दोनों दलों ने अपने विधायकों को फिर होटल में ठहराया। उसी समय परमेश्वर ने कहा कि गठबंधन पूरे पांच साल किन शर्तों पर चलेगा और किस दल को कौन से विभाग मिलेंगे, यह अभी तय नहीं हुआ है।
उस दिन क्या हुआ
मतदान से ठीक पहले भाजपा ने सुरेश कुमार का नाम वापस ले लिया और रमेश कुमार निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष चुने गए। विश्वास प्रस्ताव पर येदियुरप्पा के भाषण के बाद भाजपा विधायक सदन से बाहर चले गए और कुमारस्वामी सरकार ने ध्वनिमत से विश्वास मत जीत लिया।
यह सरकार जुलाई 2019 तक चली, जब गठबंधन के कई विधायकों के इस्तीफे के बाद वह विश्वास मत हार गई और येदियुरप्पा फिर मुख्यमंत्री बने।
यह भी देखें: आगामी चुनाव।
मूल रूप से 25 मई 2018 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को पृष्ठभूमि और बाद के घटनाक्रम के साथ नए सिरे से लिखा गया।
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