चुनावी मोड में बिहार: एनडीए में सीट बंटवारे और चेहरे पर जदयू-भाजपा में खींचतान

बिहार में लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एनडीए और विपक्षी महागठबंधन दोनों अपनी चालें तय करने में जुटे थे। रिपोर्ट के अनुसार एनडीए में सीट बंटवारे और चुनावी चेहरे को लेकर सब कुछ ठीक नहीं दिख रहा था। जदयू और भाजपा नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हुई, हालांकि दोनों दलों के वरिष्ठ नेता तल्खी कम करने की कोशिश करते दिखे।
जदयू का दावा
भाजपा लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी को एनडीए का चेहरा बनाने पर जोर दे रही थी, जबकि जदयू मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ही बिहार में गठबंधन का सबसे असरदार चेहरा बता रही थी। जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि एनडीए में सब ठीक है और नीतीश कुमार बिहार में गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने तर्क दिया कि 2014 में जदयू को भले दो सीटें मिली थीं, पर उसका वोट 16 फीसदी था, और 2009 में पार्टी 25 सीटों पर लड़ी थी। उन्होंने भरोसा जताया कि सीटों का बंटवारा मिल-जुलकर हो जाएगा।
शनिवार को इस मुद्दे पर दोनों दलों के नेता आमने-सामने आ गए। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि बिहार में चाहे लोकसभा हो या विधानसभा, एनडीए का चेहरा नीतीश कुमार होंगे और जदयू ज्यादा सीटों पर लड़ेगी। प्रवक्ता संजय सिंह ने भाजपा को याद दिलाया कि नीतीश के बिना लड़ने पर उसकी क्या हालत हुई थी, और भाजपा नेता गिरिराज सिंह के बयानों पर भी तंज कसा।
भाजपा और सहयोगियों का जवाब
भाजपा नेता नितिन नवीन ने पलटवार करते हुए कहा कि जदयू को पता है कि 2014 में उसने कितनी सीटें जीती थीं। उनके मुताबिक लोकसभा चुनाव में मोदी ही एकमात्र चेहरा होंगे और 2014 का प्रदर्शन सीट बंटवारे का आधार बनेगा। राज्य के पथ निर्माण मंत्री और भाजपा नेता नंद किशोर यादव ने कहा कि सीट बंटवारे पर मुख्यमंत्री अपनी बात रखेंगे, और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा।
लोजपा नेता और राज्य के मंत्री पशुपति नाथ पारस ने कहा कि पार्टी छह से कम सीटों पर समझौता नहीं करेगी, हालांकि मुंगेर, वैशाली और खगड़िया जैसी सीटों की अदला-बदली संभव है। रालोसपा ने संकेत दिया कि वह एनडीए में ही रहेगी, हालांकि उसके नेता नागमणि पहले कह चुके थे कि विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा भी चेहरा हो सकते हैं।
महागठबंधन में भी चुनौती
विपक्षी खेमे में भी सीटों पर खींचतान की आशंका थी। कांग्रेस ने राजद से साफ कहा कि पिछली बार जैसी स्थिति नहीं दोहराई जाएगी, जबकि राजद नेता हैसियत के हिसाब से बंटवारे की बात कर रहे थे। राजद, कांग्रेस और एनसीपी के साथ अब जीतन राम मांझी का हिंदुस्तान आवाम मोर्चा और शरद यादव का लोकतांत्रिक जनता दल भी जुड़ गए थे, यानी पांच दलों में सीटें बांटनी थीं। बसपा प्रमुख मायावती ने दोहराया कि उनकी पार्टी केवल सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही किसी से गठबंधन करेगी, वरना अकेले लड़ेगी।
आगे क्या हुआ
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने देशभर में 303 सीटें जीतीं और नरेंद्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।
मूल रूप से 25 जून 2018 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।
Related News

TMC silent on whether Mamata will share stage with Modi at Kolkata Port Trust event
It was still unclear on Thursday whether West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee would shareRead More

After Jharkhand defeat, why the BJP may need a new strategy for Bihar’s 2020 polls
The Jharkhand Mukti Morcha-led alliance is set to form the government in Jharkhand after nearlyRead More

Comments are Closed