नीतीश ने जदयू कार्यकारिणी में दिए संकेत: भाजपा के साथ, पर हर मुद्दे पर नहीं

नई दिल्ली में हुई जनता दल (यूनाइटेड) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार ने साफ किया कि भाजपा से गठबंधन जारी रहेगा, लेकिन राज्य में जदयू की ताकत बड़ी है और लोकसभा सीटों की मांग भी वह उसी के अनुरूप रखेगा। माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे पर दोनों दलों के बीच कड़ी खींचतान होगी।
सीट बंटवारे पर रुख
जदयू महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि बैठक में भाजपा के साथ सीटों के बंटवारे पर चर्चा नहीं हुई। हालांकि सूत्रों के मुताबिक नीतीश ने पदाधिकारियों के सामने 2019 की रणनीति रखी: गठबंधन बना रहेगा, पर सीटों पर बात भाजपा नेतृत्व से ठोस प्रस्ताव आने के बाद ही होगी, और पार्टी के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
नीतीश ने याद दिलाया कि 2014 में भाजपा से अलग लड़कर पार्टी केवल दो सीटें जीत सकी थी, फिर भी उसे कुल 17 फीसदी वोट मिले थे, और 2015 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने दोबारा अपना दम दिखाया। माना जा रहा था कि इसी सप्ताह पटना में उनकी भेंट भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से हो सकती है, जिसमें सीटों के तालमेल पर बात हो सकती है।
नीतीश ने राजद या उसके किसी गठबंधन में लौटने की संभावना पूरी तरह खारिज की और कहा कि पार्टी भ्रष्टाचार से समझौता नहीं करेगी। त्यागी के अनुसार महागठबंधन छोड़ने से पहले नीतीश ने राहुल गांधी से मिलकर राजद से जुड़े भ्रष्टाचार विवाद में दखल देने को कहा था; जदयू चाहता था कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई दें।
त्यागी ने यह भी कहा कि बिहार के बाहर जदयू स्वतंत्र फैसले लेगा और आगामी चार राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपने संसाधनों और जनाधार के आधार पर उम्मीदवार उतारेगा। उनके मुताबिक इसे किसी दल के समर्थन या विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कार्यकारिणी के प्रस्ताव
कार्यकारिणी ने प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट किया कि गठबंधन के बावजूद भाजपा को समर्थन मुद्दों के आधार पर ही होगा:
- एक साथ चुनाव: विधि आयोग ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का जो सुझाव दिया है, जदयू ने उसका समर्थन किया। त्यागी के अनुसार इससे उम्मीदवार का निजी खर्च तीन-चौथाई तक घट सकता है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, हालांकि इसके लिए पहले पूरी तैयारी जरूरी है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इस विचार को क्षेत्रीय दलों के लिए नुकसानदेह बता चुके हैं।
- नागरिकता बिल: पार्टी ने असम से जुड़े नागरिकता बिल का विरोध किया, जिसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों के लिए भारतीय नागरिकता के नियम आसान करने का प्रस्ताव है। प्रस्ताव में कहा गया कि नागरिकता को किसी धर्म या संप्रदाय से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
- सांप्रदायिकता: त्यागी ने धर्मनिरपेक्षता को पार्टी का मूल वैचारिक आधार बताया। उन्होंने दावा किया कि बिहार में बिना दबाव के कार्रवाई हुई और भागलपुर में तो केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के पुत्र की भी गिरफ्तारी हुई। उन्होंने पीट-पीटकर हत्या के आरोपियों का जयंत सिन्हा द्वारा स्वागत किए जाने की निंदा भी की।
आगे क्या हुआ
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 543 में से 303 सीटें जीतीं और नरेंद्र मोदी 30 मई 2019 को दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम दिसंबर 2019 में संसद से पारित हुआ।
यह भी देखें: जनता दल (यूनाइटेड), राष्ट्रीय जनता दल
मूल रूप से 9 जुलाई 2018 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।
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