मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत सभी नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्य आज लेंगे शपथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा, परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने 18 सितंबर 2017 को विधान परिषद के सदस्य के रूप में शपथ ली। विधान परिषद के सभापति ने विधान भवन के तिलक हॉल में उन्हें शपथ दिलाई।
यह क्यों जरूरी था
मार्च 2017 में सरकार बनने के समय ये पांचों नेता राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से और केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर से लोकसभा सांसद थे। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार कोई मंत्री छह महीने से अधिक समय तक विधानमंडल का सदस्य हुए बिना पद पर नहीं रह सकता, इसलिए यह समय सीमा सितंबर में पूरी हो रही थी।
भाजपा ने इसके लिए विधान परिषद का रास्ता चुना। परिषद में सीटें खाली करने के लिए विपक्ष के पांच सदस्यों, चार सपा और एक बसपा, ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा। 8 सितंबर 2017 को पांचों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित हुए।
आगे क्या हुआ
विधान परिषद में आने के बाद योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य ने अपनी लोकसभा सीटें छोड़ दीं। मार्च 2018 में हुए उपचुनावों में सपा ने बसपा के समर्थन से गोरखपुर और फूलपुर, दोनों सीटें जीत लीं, जिसे भाजपा के लिए बड़ा झटका माना गया। योगी आदित्यनाथ ने पहली बार 2022 में विधानसभा चुनाव लड़ा और गोरखपुर शहर सीट से जीतकर दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।
यह भी देखें: उत्तर प्रदेश के वर्तमान विधायक।
मूल रूप से 18 सितंबर 2017 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को पृष्ठभूमि और बाद के घटनाक्रम के साथ नए सिरे से लिखा गया।
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