राजस्थान स्थानीय निकाय उपचुनाव में कांग्रेस आगे, भाजपा को एक और झटका

राजस्थान में 6 मार्च को 21 जिलों में कराए गए स्थानीय निकाय उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा से ज्यादा सीटें जीतीं। 7 मार्च को आए नतीजों को वसुंधरा राजे सरकार के लिए एक और झटका माना गया, क्योंकि इससे पहले लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में भी कांग्रेस को सफलता मिली थी।
किसे कितनी सीटें
- जिला परिषद: 6 सीटों में से कांग्रेस को 4 और भाजपा को एक सीट मिली।
- पंचायत समिति: 21 सीटों में से कांग्रेस ने 12 और भाजपा ने 8 सीटें जीतीं, जबकि एक सीट अन्य के खाते में गई।
- नगर निकाय सदस्य: 6 सीटों में से कांग्रेस को 4 और भाजपा को दो सीटें मिलीं।
उपचुनाव ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में हुए। जीत के बाद कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने ट्वीट कर सभी को बधाई दी।
पृष्ठभूमि
इससे पहले अजमेर और अलवर लोकसभा सीटों और मांडलगढ़ विधानसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस ने तीनों जगह भाजपा को हराया था। राज्य में इसी साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने की संभावना है, इसलिए इन नतीजों को भाजपा के लिए चेतावनी के रूप में देखा गया।
हालांकि इन परिणामों से स्थानीय निकायों पर भाजपा की पकड़ पर तत्काल असर नहीं पड़ता। राज्य के 33 जिला परिषदों में से 21 अभी भी भाजपा के पास हैं, 183 नगरपालिकाओं में से 157 में उसकी सत्ता है और सभी 7 नगर निगमों में उसी के मेयर हैं।
आगे क्या हुआ
दिसंबर 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 99 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि भाजपा को 73 सीटें मिलीं। अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने।
मूल रूप से 9 मार्च 2018 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।
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