जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू, भाजपा के समर्थन वापस लेने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाने को मंजूरी दे दी, जिससे राज्य का राजनीतिक गतिरोध खत्म हुआ। मंगलवार को भाजपा के समर्थन वापस लेने से महबूबा मुफ्ती की सरकार बहुमत खो बैठी, जिसके बाद महबूबा ने राज्यपाल एनएन वोहरा को इस्तीफा सौंप दिया। राष्ट्रपति को भेजी रिपोर्ट में राज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर के संविधान के अनुच्छेद 92 का हवाला देकर यह सिफारिश की थी। 1977 के बाद यह आठवीं बार और पिछले 10 वर्षों में चौथी बार था जब राज्य में राज्यपाल शासन लगा।
गठबंधन टूटने तक
दिसंबर 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद 1 मार्च 2015 को पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार बनी थी और मुफ्ती मुहम्मद सईद 12वें मुख्यमंत्री बने थे। 7 जनवरी 2016 को उनके निधन के बाद 4 अप्रैल को महबूबा मुफ्ती ने कुर्सी संभाली। समर्थन वापसी का एलान भाजपा महासचिव और राज्य प्रभारी राम माधव ने किया। इससे पहले मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली में राज्य के भाजपा मंत्रियों की आपात बैठक की थी, और प्रधानमंत्री की सहमति के बाद घोषणा की गई।
रिपोर्ट के अनुसार केंद्र और भाजपा नेतृत्व इस बात से नाराज थे कि प्रधानमंत्री के घोषित 80 हजार करोड़ रुपये के विकास पैकेज में से राज्य सरकार केवल 22 फीसदी ही खर्च कर सकी, और घाटी में विस्थापित पंडितों के छह हजार फ्लैटों के लिए रखे गए 115 करोड़ रुपये भी खर्च नहीं हुए।
प्रतिक्रियाएं
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उन्होंने बड़े लक्ष्य के साथ भाजपा से गठबंधन किया था, तीन साल तक अनुच्छेद 370 और 35 ए की रक्षा की और 11 हजार युवाओं के खिलाफ मुकदमे वापस लिए। उन्होंने कहा, “कश्मीर में बाहुबल की नीति संभव नहीं है।” उन्होंने संघर्ष विराम का श्रेय अपनी कोशिशों को दिया और पाकिस्तान व राज्य के लोगों से बातचीत की वकालत की। नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे किसी के साथ सरकार बनाने के पक्ष में नहीं हैं और हालात सुधारकर जल्द चुनाव कराए जाएं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अवसरवादी भाजपा-पीडीपी गठबंधन ने राज्य को आग में धकेल दिया।
विधानसभा की स्थिति और आगे की रणनीति
- कुल सदस्य 87, बहुमत के लिए 44 जरूरी
- पीडीपी 28, भाजपा 25, नेशनल कॉन्फ्रेंस 15, कांग्रेस 12, अन्य 07
रिपोर्ट के मुताबिक राज्यपाल शासन में केंद्र की विकास योजनाओं पर तेजी से अमल, आतंकवाद पर सख्ती (ऑपरेशन ऑल आउट दोबारा शुरू), सीमा पार से गोलीबारी का कड़ा जवाब, अमरनाथ यात्रा के बाद भरोसा बढ़ाने के कदम और हालात सुधरने पर बातचीत की योजना थी।
आगे क्या हुआ
अगस्त 2019 में संसद ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया। 2024 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 और भाजपा ने 29 सीटें जीतीं, और उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने।
यह भी देखें: चुनाव समाचार
मूल रूप से 20 जून 2018 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।
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