Friday, January 27th, 2017
गाजियाबाद में जमीन पर नहीं दिख रहा सपा-कांग्रेस गठबंधन
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मतदान में कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन गाजियाबाद जिले में सपा-कांग्रेस गठबंधन का असर अब तक दिखाई नहीं दे रहा। जहां दूसरे दलों के प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने में लगे हैं, वहीं गठबंधन के उम्मीदवार अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने में उलझे हुए हैं। गुटबाजी और साझा रणनीति का अभाव पार्टी के पुराने और वरिष्ठ नेता भी स्वीकार करते हैं कि कार्यकर्ताओं के बीच की गुटबाजी का नुकसान उम्मीदवारों को उठाना पड़ सकता है। दोनों दलों ने अब तकRead More
उत्तराखंड के चुनावों में परिवारवाद को अक्सर नहीं मिली कामयाबी
उत्तराखंड के चुनावी इतिहास पर नजर डालने वाले एक विश्लेषण का कहना है कि राज्य में परिवारवाद की राजनीति को अक्सर झटका लगा है। इसके मुताबिक जब भी किसी नेता के परिजन ने राजनीतिक विरासत संभालने के लिए चुनाव लड़ा, शुरुआत डगमगाती रही और कई जाने-माने परिवारों के सदस्यों को मतदाताओं ने पहले ही चुनाव में नकार दिया। विश्लेषण का तर्क विश्लेषण के अनुसार अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौर से लेकर अब तक के चुनावों में परिवार के सदस्यों को आगे बढ़ाने के प्रयोग होते रहे हैं। इनमें से ज्यादातरRead More
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किच्छा सीट से दाखिल किया नामांकन
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किच्छा सीट से बुधवार को कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल किया। अपने प्रस्तावकों के साथ नामांकन कक्ष पहुंचकर उन्होंने रिटर्निंग अधिकारी नरेश दुर्गापाल को पर्चा सौंपा। ढोल-नगाड़ों के साथ समर्थक भी उनके साथ नामांकन स्थल तक आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने ऊधमसिंह नगर जिले से सांप्रदायिक ताकतों को हटाने के मकसद से किच्छा सीट को चुना है। जनसभा और जुलूस नामांकन से पहले कांग्रेस संगठन ने बरेली रोड पर मंगलम वाटिका में जनसभा रखी। वहां रावत ने कार्यकर्ताओं में जोशRead More
