अविश्वास प्रस्ताव से पहले पीएम मोदी बोले- लोकतंत्र के लिए अहम दिन, देश देख रहा है

मोदी सरकार आज लोकसभा में अपने पहले अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेगी। संख्या बल एनडीए के पक्ष में होने पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर इस बहस का राजनीतिक फायदा उठाने में लगी हैं। संख्या में कमजोर विपक्ष तीखे भाषणों से सरकार को घेरने की कोशिश करेगा, और मानसून सत्र के तीसरे दिन भी हंगामे के आसार हैं।
प्रधानमंत्री का संदेश
बहस से पहले प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर सांसदों से रचनात्मक भूमिका की अपील की। उन्होंने कहा कि आज का दिन संसदीय लोकतंत्र के लिए बेहद अहम है और उन्हें भरोसा है कि सांसद सकारात्मक, व्यापक और बिना व्यवधान की बहस सुनिश्चित करेंगे। उनके शब्दों में, “पूरा भारत आज हमें नजदीक से देख रहा होगा।”
प्रक्रिया क्या है
यह प्रस्ताव मानसून सत्र के पहले दिन तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) की ओर से लाया गया था। आज इस पर चर्चा होगी, प्रधानमंत्री अपना पक्ष रखेंगे और फिर मतदान होगा। नियमों के अनुसार प्रस्ताव स्वीकार होने के दस दिन के भीतर उस पर बहस होती है; सरकार से विचार-विमर्श के बाद अध्यक्ष तारीख तय करते हैं, और सरकार चाहे तो उसी दिन चर्चा शुरू हो सकती है।
भाजपा की रणनीति और संख्या
भाजपा के लिए सवाल केवल जीत का नहीं, बल्कि इतने बड़े अंतर से जीत का है कि विपक्ष नैतिक रूप से हार मानने को मजबूर हो। बीजद, अन्नाद्रमुक और टीआरएस ने अपना रुख सार्वजनिक नहीं किया था, जबकि भाजपा की कोशिश दो-तिहाई बहुमत जुटाने की थी। गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में इसकी रूपरेखा बनी और पार्टी नेताओं ने राजग से बाहर के दलों से भी संपर्क साधा।
545 सदस्यीय लोकसभा में इस समय 535 सांसद हैं, यानी सरकार बचाने के लिए 268 वोट चाहिए। भाजपा के पास 273 सांसद हैं। इसमें सहयोगियों को जोड़ें, यानी शिवसेना 18, एलजेपी 6, अकाली दल 4 और बाकी 9, तो कुल आंकड़ा 310 हो जाता है।
आगे क्या हुआ
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 543 में से 303 और कांग्रेस ने 52 सीटें जीतीं। नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2019 को दूसरे कार्यकाल की शपथ ली।
यह भी देखें: तेलुगु देशम पार्टी, लोकसभा सदस्य
मूल रूप से 20 जुलाई 2018 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।
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