रिश्ते बेहतर करने के लिए जल्द ही राहुल खुद करेंगे नीतीश से बात
इंडिया वोट कर टीम के अनुसार
राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए के प्रत्याशी को सपोर्ट न करने के बावजूद नीतीश पर कांग्रेस के नरम रुख के बाद अब उनसे रिश्ते बेहतर करने के लिए जल्द ही राहुल खुद करेंगे नीतीश कुमार से बात करेंगे. राष्ट्रपति चुनाव में नीतीश के बदले रुख को राहुल गांधी चिंता का विषय नहीं मानते.
राहुल की पहल पर ही कांग्रेस प्रवक्ता सिंघवी ने नीतीश पर नरम रुख अपनाया था. राहुल गांधी को यह भरोसा है कि नीतीश साथ रहेंगे और बिहार में गठबंधन सरकार को कोई खतरा नहीं है.
उप राष्ट्रपति के उम्मीदवार पर भी होगी बात
सूत्रों के मुताबिक राहुल मानते हैं कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में नीतीश का रुख ज़्यादा मायने नहीं रखता और नीतीश बस लालू पर अंकुश रखने के लिए ऐसा कर रहे हैं. लालू और उनके परिवार पर चल रहे मामलों से फिलहाल गठबंधन पर कोई असर नहीं होगा.
गौरतलब है कि राहुल गांधी छुट्टियां मनाने के लिए विदेश गए थे. राहुल के विदेश में रहते समय ही नीतीश के बदले रुख के चलते नीतीश और कांग्रेस में तनाव बढ़ गया था. राहुल ने लौटते ही रिश्ते सामान्य करने की कवायद शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक राहुल अपने दूत के ज़रिए नीतीश तक संदेश पहुंचा चुके हैं.
राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार की वकालत करते-करते नीतीश कुमार ने एनडीए के उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान कर दिया. 2019 में विपक्षी एकता की शुरुआती तैयारी ही दरक गई. बिहार में लालू और कांग्रेस के समर्थन से चल रही महागठबंधन की सरकार पर खतरा दिखने लगा.
इसी बीच नीतीश के रुख से नाराज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने नीतीश पर तीखा हमला किया तो दूसरी तरफ से नीतीश के प्रवक्ता केसी त्यागी ने जवाबी हमला बोल दिया. खुद नीतीश ने भी एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा दिया कि वो कांग्रेस के पिछलग्गू नहीं हैं. इसके बाद तो सवाल उठा कि क्या महागठबंधन के दिन पूरे हो गए?
राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार के नाम के ऐलान और उनके नामांकन के वक्त राहुल गांधी विदेश में थे. राहुल को ही नीतीश के साथ कांग्रेस के गठबंधन की मुख्य वजह माना जाता है. राहुल के करीबी मानते हैं कि 2019 में अगर विपक्ष के किसी और नेता को पीएम बनाने की बात आई तो राहुल की पहली पसंद नीतीश हो सकते हैं. इससे भी राहुल और नीतीश की आपसी समझ का अंदाजा लगाया जा सकता है.
इसीलिए विदेश से राहुल लौटे तो कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से अपने तेवर नरम कर लिए. दरअसल, सूत्रों के मुताबिक राहुल को ये भरोसा है कि राष्ट्रपति चुनाव में नीतीश ने बिहार के राज्यपाल होने के नाते भले ही कोविंद का समर्थन किया हो लेकिन वो एनडीए में नहीं जाएंगे. साथ ही नीतीश ये कदम लालू पर चेक रखने के लिए भी उठाया है. इसके ज्यादा मायने नहीं निकालने चाहिए.
Source: Aaj Tak
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