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मोदी के खिलाफ महागठबंधन या तीसरा मोर्चा? विपक्ष के बड़े नेताओं में ही संशय

Narendra Modi

2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए विपक्ष में दो विकल्पों की चर्चा होती रही है: महागठबंधन और तीसरा मोर्चा। लेकिन विपक्ष के प्रमुख नेता न तो इन दोनों पर पूरा भरोसा कर पा रहे हैं और न ही किसी एक राय पर पहुंच पा रहे हैं। ताजा संदेह एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने जताया है।

पवार और देवगौड़ा के बयान

पूर्व केंद्रीय मंत्री पवार ने एक अंग्रेजी चैनल से बातचीत में कहा कि तीसरा मोर्चा व्यावहारिक नहीं है, इसलिए वह नहीं बन पाएगा। उन्होंने माना कि उनके कई साथी महागठबंधन चाहते हैं, पर साथ ही कहा, “मुझे खुद भी महागठबंधन पर बहुत भरोसा नहीं है।” उनके अनुसार मौजूदा हालात 1977 जैसे लगते हैं। इसे विपक्षी एकता के लिए झटका माना गया।

पवार का बयान ऐसे समय आया जब जेडीएस प्रमुख एचडी देवगौड़ा तीसरे मोर्चे पर जोर दे रहे थे। इससे पहले तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव मिलकर ऐसे मोर्चे की कोशिश शुरू कर चुके थे, जबकि कांग्रेस महागठबंधन को अपने लिए ज्यादा फायदेमंद मानती है। देवगौड़ा ने यह भी कहा कि कर्नाटक में कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण में विपक्षी नेताओं का जुटना एकजुटता दिखाता है, मगर इसका अर्थ यह नहीं कि 2019 में सब मिलकर लड़ेंगे।

एकता की पृष्ठभूमि

विपक्षी दल मानते हैं कि 2014 के बाद से, कुछ अपवादों को छोड़कर, भाजपा लगातार मजबूत रही है और पुराने समीकरणों से उसका मुकाबला कठिन है। उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में सपा और बसपा ने बरसों की दुश्मनी छोड़कर साथ आने का फैसला किया, जिससे विपक्ष को जीत का एक फॉर्मूला मिला। कर्नाटक में कांग्रेस ने चुनाव से पहले जेडीएस से गठबंधन नहीं किया था, लेकिन नतीजों के बाद उसके साथ सरकार बनाने की पहल की।

राज्यों में अड़चनें

  • उत्तर प्रदेश: सपा और बसपा साथ लड़ना चाहती हैं, लेकिन कांग्रेस को लेकर सहज नहीं हैं। सपा राज्य की 80 सीटों में से कांग्रेस को केवल दो देना चाहती है, और मुलायम सिंह यादव कह चुके हैं कि इस गठबंधन में कांग्रेस को जगह नहीं मिलनी चाहिए।
  • तेलंगाना: मुख्यमंत्री केसीआर का सीधा मुकाबला कांग्रेस से है, इसलिए वह महागठबंधन की जगह गैर-कांग्रेसी दलों का मोर्चा चाहते हैं और कांग्रेस से दूरी रखने वाले कई विपक्षी नेताओं से मिल चुके हैं।
  • पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी ने सुझाव दिया था कि जिस राज्य में जो दल सबसे बड़ा हो, वही नेतृत्व करे और बाकी उसका साथ दें। कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व ममता के साथ जाने के पक्ष में दिखता है, पर राज्य इकाई इसके खिलाफ है, जबकि सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी कांग्रेस से गठबंधन की वकालत कर रहे हैं।

आगे क्या हुआ

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 543 में से 303 और कांग्रेस ने 52 सीटें जीतीं। नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2019 को दूसरे कार्यकाल की शपथ ली।

यह भी देखें: एनसीपी, चुनावी खबरें

मूल रूप से 2 जुलाई 2018 को प्रकाशित। 9 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से लिखा गया।






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